हातम सिंह की दहल (व्यक्तित्व प्रसिद्धि)
भूमिका अत्यंत रोचक और लोकगाथा-आधारित व्यक्तित्व प्रसिद्धि है यह। प्रस्तुत कथा ऐतिहासिकता और लोकविश्वास—दोनों के संतुलन पर आधारित है, जिसने हातम सिंह को एक बड़े क्षेत्र में प्रसिद्धि दिला दी।अवगत होइए हातम सिंह की दहल से। हातम सिंह की दहल उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद की मवाना तहसील का एक छोटा-सा गाँव है — नंगली। चारों ओर गन्ने के खेत, मिट्टी की सोंधी गंध, और गाँव की चौपाल पर शाम ढलते ही जमा होती आवाज़ें। परंतु जब बुज़ुर्ग किसी नाम को आदर और भय दोनों से लेते हैं — हातम सिंह — तो बच्चे तक सहम जाते हैं। कहते हैं, हातम सिंह कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। वे गाँव के उन दिनों के सरदार थे जब न्याय के लिए पंचायतों से पहले इंसानियत की पुकार होती थी। उनका कद न सिर्फ़ काठी में बड़ा था, बल्कि निर्णय में भी अडिग। जो गलत करता, उसके लिए उनका एक ही शब्द काफ़ी होता था। किंवदंती है कि एक बार मवाना के आस-पास डकैतों का आतंक फैल गया था। व्यापारी रास्तों से गुजरने से डरते थे, और किसानों की फसलें लूट ली जातीं। तब गाँव की पंचायत ने हातम सिंह से कहा— “अब या तो तू ही कुछ कर, वरना गाँव उजड़ जाएगा।” उस रात उन्होंने अपन...