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मानसिक विषाक्तता को समझने से खुशहाली की ओर बढ़ने का मार्ग

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मानसिक विषाक्तता को समझने से खुशहाली की ओर बढ़ने का मार्ग एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा में ‘टॉक्सिक : मानसिक विषाक्तता से खुशहाली की ओर’ विषय पर संवाद उलझन सुलझन प्रतिनिधि | नोएडा मनुष्य के जीवन में विषाक्तता केवल बाहरी वातावरण, खान-पान या भौतिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं होती। विचारों में लगातार बनी नकारात्मकता, अनियंत्रित तनाव, भावनात्मक दबाव, अस्वस्थ संवाद और रिश्तों में बढ़ती दूरी भी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसी व्यापक दृष्टि को सामने रखते हुए एमिटी विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के रेखी फाउंडेशन सेंटर फॉर साइंस ऑफ हैप्पीनेस की ओर से विद्यार्थियों के लिए ‘टॉक्सिक : मानसिक विषाक्तता से खुशहाली की ओर’ विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. मुकेश बत्रा, संस्थापक बत्रा ग्रुप ऑफ क्लीनिक्स, मुंबई तथा ओशो अनुज स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी, संस्थापक ओशो फ्रेग्रेन्स, ने विद्यार्थियों के साथ मानसिक एवं भावनात्मक विषाक्तता, तनाव, ध्यान, आत्म-जागरूकता, रिश्तों और उद्देश्यपूर्ण जीवन जैसे विषयों पर संवाद किया। यह कार्यक्रम ‘खुशहाली और अध्यात्म प...

वेदपाल सिंह चपराणा

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वेदपाल सिंह चपराणा   साधारण परिवेश से असाधारण पहचान तक जिला कमांडेन्ट (होमगार्ड्स) वेदपाल सिंह का जीवन इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा को यदि संकल्प, अनुशासन और कर्मठता का साथ मिल जाए तो साधारण परिस्थितियाँ भी असाधारण उपलब्धियों की राह बन सकती हैं। डॉ. देशराज सिंह के ग्रामीण अंचल से आने वाले इस शिष्य ने अपने जीवन को जिस धैर्य, लगन और संकल्प के साथ सँवारा है, वह निश्चित रूप से किसी को भी गर्व से भर देने वाला है। एक सामान्य खेतिहर परिवार और अपने ग्राम के परिवेश से निकलकर उन्होंने शिक्षा को अपनी प्रगति का आधार बनाया। अध्ययन के दौरान वे स्वयं को किसी असाधारण विद्यार्थी के रूप में भले ही स्थापित न कर पाए हों, लेकिन आगे बढ़ने की उनकी ललक और कुछ कर गुजरने का संकल्प लगातार मजबूत होता गया। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विज्ञान विषय के अपने गाँव के इस प्रथम उच्च शिक्षित युवा ने एम.फिल. शिक्षाशास्त्र से की। एक शिक्षित के रूप में वेदपाल सिंह की जीवन यात्रा स्वयं में प्रेरणादायक है। जिस परिवेश में उच्च शिक्षा के अवसर सहज उपलब्ध नहीं होते, वहाँ से निकलकर शिक्षाशास्त्र जैसे विषय में एम.फिल. त...

विश्व उद्यमिता दिवस विशेष

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  विश्व उद्यमिता दिवस विशेष अपने प्रयासों से अपनी राह बनाने वाले गोरख सिंह की प्रगति कथा साहसिक संकल्प से सफलता तक का सफर विश्व उद्यमिता दिवस केवल व्यापार करने वालों को बधाई देने का अवसर नहीं, बल्कि उन लोगों के प्रयासों को पहचानने का दिन है, जो अपनी सोच, साहस और निरंतर परिश्रम से अपने लिए रास्ता बनाते हैं। श्री गोरख सिंह प्रधान ऐसे ही कर्मठ उद्यमी हैं, जिन्होंने लगभग दो वर्ष पूर्व राम-सर मैनपॉवर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज की शुरुआत कर अपने संकल्प को कार्यरूप दिया और आज अपनी प्रगति के ग्राफ को निरंतर ऊँचाई प्रदान कर रहे हैं। गोरख सिंह की कहानी किसी तैयार अवसर को पाने की कहानी नहीं है। यह उस व्यक्ति की कहानी है जिसने अपने प्रयासों और विश्वास के बल पर अवसरों का निर्माण किया। सुरक्षा और मैनपॉवर सेवाओं जैसे प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में कदम रखना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने चुनौतियों को बाधा मानने के बजाय उन्हें अपनी क्षमता साबित करने का अवसर माना। उनकी सोच स्पष्ट थी कि यदि सेवा में गुणवत्ता, व्यवहार में अनुशासन और कार्य में ईमानदारी हो, तो विश्वास अर्जित किया जा सकता है। इसी विश्वास के साथ र...

सम्मान

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  प्रेस विज्ञप्ति बहुमुखी प्रतिभा की धनी प्रभा जी का सम्मान प्रतिभा, परिश्रम और आत्मविश्वास का अद्भुत संगम प्रस्तुत करते हुए प्रभा जी ने मास्टर एक्वेटिक्स प्रतियोगिताओं में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। 30–35 वर्ष की महिला वर्ग की 50 मीटर तैराकी स्पर्धा में उन्होंने लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया। वर्ष 2022 में उन्होंने एक ही प्रतियोगिता में चार स्वर्ण पदक जीतकर उल्लेखनीय उपलब्धि अपने नाम दर्ज की। प्रभा जी का साहस और आत्मविश्वास उस समय भी देखने को मिला जब उन्होंने 18 फीट की ऊँचाई से स्विमिंग पूल में छलांग लगाकर अपने अद्भुत कौशल का प्रदर्शन किया। यह उपलब्धि उनकी शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और कठिन चुनौतियों का सामना करने के जज़्बे का प्रतीक है। खेल जगत में उत्कृष्टता के साथ-साथ प्रभा जी कला और साहित्य के क्षेत्र में भी समान रूप से सक्रिय हैं। उन्हें चित्रकला, लेखन, काव्य-सृजन तथा बागवानी में विशेष रुचि है। उन्होंने अनेक कला प्रदर्शनियों का सफल आयोजन किया है तथा अपनी रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से समाज में सकारात्मक सं...

सीमाओं से परे सोच का नाम है रामस्वरूप गुर्जर

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सीमाओं से परे सोच का नाम है  रामस्वरूप गुर्जर राजस्थान की धरती सदैव ऐसे व्यक्तित्वों को जन्म देती रही है, जो अपनी सादगी, संवेदनशीलता और कर्मशीलता से समाज में नई प्रेरणा जगाते हैं। पचेवर निवासी श्री राम स्वरूप गुर्जर भी ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने सामाजिक सरोकारों को केवल विचारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से जीवंत रूप दिया। सामाजिक चेतना, मानवीय मूल्यों और जनहित के प्रति समर्पित उनका जीवन आज एक नई वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर हुआ है। प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फिल्म कार्यशाला में उनका चयन इस बात का प्रमाण है कि यदि सोच सकारात्मक हो और उद्देश्य समाज के हित से जुड़ा हो, तो छोटे स्थानों से उठने वाली आवाज़ भी विश्व मंच तक पहुँच सकती है। 7 से 9 सितंबर 2026 तक इंडोनेशिया के बाली में आयोजित होने वाली इस अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में 55 देशों के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता, कथाकार और सामाजिक प्रभाव से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे। ऐसे महत्वपूर्ण मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए श्री राम स्वरूप गुर्जर का चयन होना केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक च...

प्रगतिशील कृषक सुरेंद्र अवाना

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प्रगतिशील कृषक सुरेंद्र अवाना   एकीकृत कृषि, गौ-संवर्धन और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का प्रेरक मॉडल विशेष आलेख | उलझन सुलझन भारत की कृषि व्यवस्था आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। बढ़ती लागत, घटते प्राकृतिक संसाधन, जलवायु परिवर्तन और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच यदि कोई मॉडल किसानों को स्थायी आय, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समृद्धि का मार्ग दिखा रहा है, तो वह है एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) । इस दिशा में राजस्थान की धरती पर कार्यरत प्रगतिशील कृषक श्री सुरेंद्र अवाना का व्यक्तित्व एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरता है। हाल ही में जयपुर स्थित उनके निवास पर श्री मोहनलाल वर्मा, प्रो. राकेश राणा, असिस्टेंट प्रोफेसर देवेंद्र नागर तथा उलझन सुलझन के प्रतिनिधि ने उनसे आत्मीय भेंट कर कृषि, नवाचार, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण तथा एकीकृत कृषि के विविध आयामों पर विस्तृत चर्चा की। यह मुलाकात केवल परिचय भर नहीं थी, बल्कि भारतीय कृषि के भविष्य पर गंभीर चिंतन का अवसर भी बनी। 450 गिर गौवंश के साथ आत्मनिर्भर कृषि का जीवंत उदाहरण श्री सुरेंद्र अवाना का सबसे उल्लेखनीय कार्य है लगभग 450 गिर नस...