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सशक्तिकरण का श्रेष्ठ उदाहरण हैं बिंदु चौधरी जी

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व्यक्तित्व बिंदु चौधरी एक बहुमुखी व्यक्तित्व हैं जिन्होंने शिक्षा, साइबर सुरक्षा, और सामाजिक कार्यों में राजस्थान शासन को महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने मिशन ज्ञान ऐप पर कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के लिए सात सौ से अधिक वीडियो बनाकर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अमूल्य सेवा दी है। उनकी पहचान डिजिटल शिक्षक, शिक्षक सितारा, और सफल परिणामों के साथ जुड़ी है, जो दसवीं और बारहवीं के छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इसके अलावा, उन्होंने राज्य तथा जिला स्तर पर स्वीप कोऑर्डिनेटर के रूप में भी काम किया है और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उन्होंने G20 समिट में मातृशक्ति के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त किया है। वर्तमान में बिंदु राजस्थान और गुजरात की ब्रांड एंबेसडर तथा पुलिस विभाग के साथ जुड़ी हुई हैं, साथ ही एनसीईआरटी दिल्ली के लाइव प्रोग्रामों में विषय विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। वे स्पर्श ऑर्गेनाइजेशन के साथ गुड टच-बैड टच की ट्रेनिंग सेशंस भी आयोजित करती हैं। उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान बाईस देशों में फैली है और व...

विरेन्द्र सिंह - रणजी के रणबांकुरे की गाथा, जो भारतीय क्रिकेट का अनकहा सितारा बना

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विरेन्द्र सिंह 'बीरे'  रणजी के रणबांकुरे की गाथा, जो भारतीय क्रिकेट का अनकहा सितारा बना भारतीय क्रिकेट में जब कभी भी महान खिलाड़ियों की चर्चा होती है, तो अधिकतर ध्यान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले सितारों की ओर जाता है। लेकिन इस व्यापक परिदृश्य में कई ऐसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी हैं जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में अद्वितीय प्रदर्शन के बावजूद राष्ट्रीय टीम के लिए कभी पदार्पण नहीं किया। इन्हीं में से एक नाम है — विरेन्द्र सिंह, उत्तर प्रदेश के उस महान रणजी खिलाड़ी का, जिसने वर्षों तक अपनी लगन, परिश्रम और खेल कौशल से मैदान पर इतिहास रचा। जन्म और प्रारंभिक जीवन विरेन्द्र सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश के एक औसत ग्रामीण परिवार में बुलंदशहर जनपद के ग्राम देवटा में हुआ। बचपन से ही क्रिकेट के प्रति उनकी लगन देखने योग्य थी। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद, उन्होंने संसाधनों की कमी को कभी अपनी प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया। बल्ला और गेंद दोनों के साथ उनका संतुलन ऐसा था कि शुरुआती कोच उन्हें एक ‘पूर्ण खिलाड़ी’ कहा करते थे। रणजी ट्रॉफी का चमकता सितारा उत्तर प्रदेश की रणजी टीम से खेलते हुए विर...

साधारण किशोरी की असाधारण उड़ान

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🌟 पूजा सिंह 🌟 हरियाणा के एक छोटे से गांव बोस्ती की रहने वाली पूजा सिंह आज लाखों किशोरियों के लिए उम्मीद की एक किरण बन चुकी हैं। एक ऐसा इलाका, जहाँ किशोरियों के सपने अक्सर घर की चारदीवारी में ही दम तोड़ देते हैं, वहीं से पूजा ने आसमान छूने की ठान ली । उनके पिता हंसराज खुद एक खिलाड़ी बनना चाहते थे, लेकिन ज़िम्मेदारियों ने उन्हें राजमिस्त्री बना दिया। फिर भी उन्होंने अपनी बेटी के सपनों की नींव को कभी कमजोर नहीं होने दिया। शुरुआत में पूजा योग और जिमनास्टिक में रुचि रखती थीं, लेकिन 2018 में कोच बलवान सिंह पात्रा से हुई मुलाक़ात ने उनकी दिशा ही बदल दी। कोच ने पूजा की काबिलियत को पहचाना और उन्हें ऊँची कूद (High Jump) के लिए तैयार किया। 🏋️‍♀️ सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन संकल्प और स्टैमिना ज़रूर था पूजा के पास न जंपिंग मैट था, न हाइट मापने वाले उपकरण , लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने पराली से भरे बोरे, बांस के खंभे और रबर टायर से ऐसा ट्रेंनिंग सेटअप बनाया, जिसे देखकर बड़े-बड़े स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट भी चकित हो जाएं। 💪 कड़ी मेहनत और स्टैमिना बिल्डिंग रूटीन पूजा की सफलता ...

🌟व्यक्तित्व : दीपशिखा क्षेत्रपाल🌟

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 🌟व्यक्तित्व : दीपशिखा क्षेत्रपाल🌟 जन्मतिथि: 5 नवम्बर 1980 | निवास: अजमेर, राजस्थान व्यवसाय: शारीरिक शिक्षक | विशेष पहचान: राष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी, समाजसेविका, लेखिका, सांस्कृतिक दूत। दीपशिखा क्षेत्रपाल जी एक ऐसा नाम हैं, जो न केवल खेल जगत में ऊँचाइयाँ छू चुका है, बल्कि समाजसेवा, साहित्य, और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। जन्म से ही बहुआयामी प्रतिभा की धनी दीपशिखा जी को विद्यालय काल में ही अजमेर के तत्कालीन जिला कलेक्टर द्वारा सम्मानित किया गया, जो उनके प्रतिभाशाली व्यक्तित्व का आरंभिक प्रमाण था। एनसीसी में अंडर ऑफिसर के रूप में 'सी' सर्टिफिकेट प्राप्त कर उन्होंने न केवल नेतृत्व कौशल सिद्ध किया, बल्कि दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर आयोजित भव्य राष्ट्रीय परेड में थल सेना ग्रुप का कमांड कर एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। खेलों में उनकी सशक्त उपस्थिति ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर के गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल दिलाए, जो यह दर्शाता है कि उन्होंने अपनी प्रोफेशनल जिम्मेदारियों के साथ खेल भावना को भी जीवंत रखा। दीपशिखा जी एक राष्ट्रीय स्तर की बास्केटबॉ...

सरदार पटेल और उनके कृतित्व (सेमिनार में संबोधन)

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सरदार पटेल और उनके कृतित्व सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन को यदि समझना हो, तो उसे दो प्रमुख हिस्सों में बाँटकर देखा जा सकता है — पहला भाग 1947 से पहले का, और दूसरा 1947 के बाद का। इन दोनों चरणों में उनका व्यक्तित्व अलग-अलग रंगों में निखरकर सामने आता है। 1947 से पहले का दौर उनके क्रांतिकारी चिंतन, नेतृत्व क्षमता और किसानों के अधिकारों के लिए उनके संघर्ष का परिचायक है। जबकि 1947 के बाद का समय उनके अद्वितीय प्रशासनिक कौशल, भारत के एकीकरण की ऐतिहासिक भूमिका और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। सरदार पटेल एक क्रांतिकारी सोच रखने वाले परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता झबेरभाई पटेल 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल थे और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की सेना में रहते हुए अंग्रेजों के विरुद्ध लड़े थे। ऐसे परंपरा से निकले सरदार पटेल में बचपन से ही देशभक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी थी। सरदार पटेल, महात्मा गांधी और विजय सिंह पथिक — ये तीनों भारत के किसान आंदोलन से निकले ऐसे नेता थे जिन्होंने ग्रामीण भारत की पीड़ा को समझा और उसकी आवाज़ को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा।...

साहित्य, संस्कृति और समर्पण की प्रतीक व्यक्तित्व हैं डॉ. कमला गोकलानी

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डॉ. कमला गोकलानी एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने सिंधी और हिंदी साहित्य को अपनी लेखनी, अनुवाद, और संपादन के माध्यम से समृद्ध किया है। वे न केवल एक कुशल लेखिका और भाषाविद् हैं, बल्कि एक संवेदनशील शिक्षिका, सजग संपादिका और समर्पित सांस्कृतिक साधिका भी हैं। उनके लिए साहित्य मात्र शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि विचार, अनुभूति और संस्कृति को जीवित रखने का माध्यम है। उच्च शिक्षाविद् के रूप में उन्होंने एम.ए., पीएच.डी. (सिंधी), एम.ए. (हिंदी), एम.एड. और पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा जैसी विविध योग्यताएँ प्राप्त की हैं। अपने अकादमिक और साहित्यिक जीवन के समन्वय से उन्होंने न केवल शिक्षण के क्षेत्र में बल्कि शोध और सृजन में भी अनुकरणीय योगदान दिया है। वे स. पू. चौ. राजकीय महाविद्यालय, अजमेर में आचार्य पद से सेवानिवृत्त हुईं और महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में सिंधू शोध पीठ की उपनिदेशक रही हैं। 61 से अधिक प्रकाशित पुस्तकों की लेखिका डॉ. गोकलानी को अनेक राष्ट्रीय और प्रांतीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। विशेष रूप से 2010 में साहित्य अकादमी द्वारा कबीर ग्रंथावली के क...