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कर्तव्य को सर्वोपरि रखने वाले परम सिंह जी

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भूमिका सृष्टि में कुदरत ने ऐसे अनेक बिरले मानव संसाधन दिए हैं जो अपने आप को स्वाभाविक तरीके से अपने व्यक्तित्व का निर्माण स्वयं करते हैं और प्रचार या प्रसार के लिए नहीं अपितु समाज निर्माण के ध्येय से तथा एक सत्यपरक तथ्य यह है कि वो ऐसा कर भी पाते हैं। आइए आज जानते हैं एक ऐसी ही शख्सियत परम सिंह जी के बारे में। कर्तव्य सर्वोपरि अभी कुछ दिन पूर्व ही हसनपुर में श्रीमती सुखदेवी इंटर कालेज के प्रधानाचार्य परम सिंह को 'भारत विभूति सम्मान' मिलने पर जनमानस के द्वारा यदि हर्ष जताया गया तो यह यूं ही नहीं था। इस विभूति ने साधना की है और निर्लोभ। और! साधना अभी जारी है बालकों के जीवन को संवारने की। सब कुछ 'संकल्प' के अंतर्गत चल रहा है जिसको उन्होंने विद्यालय के दैनिक क्रियाकलापों को एक प्रेरक पुस्तिका का रूप दे दिया तो इसलिए कि विद्यालय इसको अक्षरशः लागू कर दे और उनका विद्यालय एक आदर्श विद्यालय बन जाए। दिलचस्प यह है कि उनके संकल्प को अनेक विद्यालय मौन ही अंगीकृत कर लाभान्वित हो रहे हैं। ईश्वर भी इनके समक्ष उत्पन्न होने वाली बाधाओं से लगातार उबार रहे हैं तो क्षेत्र में इनकी लोकप्रियत...

विजय सिंह 'पथिक'

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उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में तहसील मवाना स्थित ग्राम पाली के मौलिक कवि विजय सिंह 'पथिक' जी से मिलने का सौभाग्य उन्नत कृषक श्री प्रकाशचंद जी के प्रयासों से संभव हो सका। विजय सिंह एक नैसर्गिक कवि जिनकी महारथ है त्वरित काव्य रचना करने में। अरसा पूर्व काव्य रचना लिखकर किया करते थे, लेकिन उनके द्वारा संकलित रचनाओं को लेकर आपके साथ एक ऐसी घटना हुई कि उन्होंने काव्य लिखकर करना त्याग दिया और उसके बाद से अब उनका काव्य मौलिक है और संस्कृति को सहेजता हुआ। विषय कोई भी हो सब में सांस्कृतिक मूल्यों की झलक मिलती है। मुलाकात के समय उन्होंने जीवन की कुछ दिलचस्प घटनाएं सुनाईं। ईशकृपा को लेकर भी उन्होंने जीवन की कुछ झलकियां सुनायीं। एक बार २६ जनवरी के अवसर पर अपनी काव्य रचनाएं किसी शिक्षण संस्थान में सुनाने के ध्येय से अपनी पुत्री की ससुराल दिल्ली गए, लेकिन आकस्मिक कारणों से ऐसा संभव ना हो सका तो निराशा भाव से भर कर लौटने लगे। वापसी में बस यात्रा के दौरान उनको एक युवती मिली जिसने उनसे मोदीनगर में उतरने का आग्रह किया। पथिक जी असमंजस में पड़ गए। और! वे युवती के पुनः किए आग्रह को टाल नहीं सके और य...