मानसिक विषाक्तता को समझने से खुशहाली की ओर बढ़ने का मार्ग
मानसिक विषाक्तता को समझने से खुशहाली की ओर बढ़ने का मार्ग एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा में ‘टॉक्सिक : मानसिक विषाक्तता से खुशहाली की ओर’ विषय पर संवाद उलझन सुलझन प्रतिनिधि | नोएडा मनुष्य के जीवन में विषाक्तता केवल बाहरी वातावरण, खान-पान या भौतिक परिस्थितियों तक सीमित नहीं होती। विचारों में लगातार बनी नकारात्मकता, अनियंत्रित तनाव, भावनात्मक दबाव, अस्वस्थ संवाद और रिश्तों में बढ़ती दूरी भी व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। इसी व्यापक दृष्टि को सामने रखते हुए एमिटी विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के रेखी फाउंडेशन सेंटर फॉर साइंस ऑफ हैप्पीनेस की ओर से विद्यार्थियों के लिए ‘टॉक्सिक : मानसिक विषाक्तता से खुशहाली की ओर’ विषय पर विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. मुकेश बत्रा, संस्थापक बत्रा ग्रुप ऑफ क्लीनिक्स, मुंबई तथा ओशो अनुज स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती जी, संस्थापक ओशो फ्रेग्रेन्स, ने विद्यार्थियों के साथ मानसिक एवं भावनात्मक विषाक्तता, तनाव, ध्यान, आत्म-जागरूकता, रिश्तों और उद्देश्यपूर्ण जीवन जैसे विषयों पर संवाद किया। यह कार्यक्रम ‘खुशहाली और अध्यात्म प...