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दृढ़प्रतिज्ञ प्रकृति का व्यक्तित्व हैं श्री अमराराम गुर्जर

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परिचय नाम - अमराराम गुर्जर   जन्मस्थान - ढूंढा लांबोड़ी गांव, पाली जिला, राजस्थान   वर्तमान पद - भारत के अगले उच्चायुक्त, मलावी गणराज्य   सेवा - भारतीय विदेश सेवा (IFS)   उपलब्धियाँ    - इटली में भारत के उपराजदूत   - विदेश मंत्रालय में निदेशक और संयुक्त सचिव   - भारत का प्रतिनिधित्व मिस्र, ओमान, पुर्तगाल आदि देशों में   प्रेरणादायक जीवन यात्रा   एक साधारण पशुपालक परिवार से निकलकर, अमराराम गुर्जर ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। बचपन में बकरियां चराना, नंगे पांव स्कूल जाना, आर्थिक तंगी में पढ़ाई छोड़ना—इन सभी संघर्षों को पार करते हुए उन्होंने दृढ़ निश्चय और मेहनत से अपना मार्ग बनाया। अपने माता-पिता के निधन जैसी गहरी व्यक्तिगत क्षति के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बिना कॉलेज गए स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की। सरकारी शिक्षक, उप निरीक्षक और स्टेशन मास्टर जैसी नौकरियों को पीछे छोड़ते हुए, उनका लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवाओं तक पहुँचना रहा। यूपीएससी सफर  - 2006: पहला प्रयास, इंटरव्यू ...

एक अम्बेडकर जो भुला दिए गए!

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एक अम्बेडकर जो भुला दिए गए! हम जब भी डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम लेते हैं, तो हमारे मन में एक महान विचारक, संविधान निर्माता और समाज सुधारक की छवि उभरती है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि 'अंबेडकर' नाम भीमराव को स्वयं जन्म से नहीं मिला था। उन्हें यह नाम देने वाले एक ऐसे शिक्षक थे, जिनका समर्पण, दूरदृष्टि और मानवीयता अपने आप में मिसाल है—वे थे कृष्णाजी केशव अंबेडकर । कृष्णाजी केशव अंबेडकर एक सामान्य अध्यापक थे, लेकिन उनके भीतर असामान्य संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय के लिए गहरी प्रतिबद्धता थी। जब उन्होंने भीमराव रामजी सकपाल को एक होनहार लेकिन सामाजिक रूप से वंचित विद्यार्थी के रूप में देखा, तो उन्होंने न सिर्फ उसे पढ़ाया-लिखाया, बल्कि उसे अपना नाम—"अंबेडकर"—भी दे दिया, ताकि वह समाज में सम्मानपूर्वक पहचान बना सके। यह केवल नाम नहीं था, यह एक पहचान, एक शक्ति और एक विश्वास था जो आगे चलकर भारत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया। लेकिन उनका योगदान केवल यहीं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने बड़ौदा के महाराजा गायकवाड़ से व्यक्तिगत रूप से सिफारिश करके भीमराव अंबेडकर को विदेश जाकर...

शेखर—सीमाओं को लांघता एक अडिग व्यक्तित्व

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भूमिका   हर युग में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो समाज की परंपरागत सोच को चुनौती देते हैं। वे न सिर्फ अपने लिए राह बनाते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी उम्मीद की एक नई दिशा छोड़ जाते हैं। ऐसे ही व्यक्तित्व का नाम है मेरठ का शेखर — एक ऐसा युवा जिसने अपनी शारीरिक कमी को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उसी को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल डाला। व्यक्तित्व का सार   शेखर, हापुड़ जनपद के बहादुरपुर गांव से आने वाला एक साहसी युवा है, जिसकी लंबाई महज तीन फीट है। लेकिन उसके सपने इतने ऊंचे हैं कि उन्होंने समाज की हर सीमित सोच को पीछे छोड़ दिया। खेलों में रुचि रखने वाले शेखर ने पैरा एथलेटिक्स को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया और शॉटपुट व भाला फेंक जैसी प्रतियोगिताओं में राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर खुद को साबित किया। शेखर का व्यक्तित्व आत्मबल, धैर्य और संघर्ष की प्रतिमूर्ति है। बचपन से ही लोगों के तानों और उपेक्षा का सामना करते हुए उन्होंने जिस धैर्य और सकारात्मक सोच से खुद को आगे बढ़ाया, वह हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। वह प्रतिदिन पांच घंटे की कठोर मेहनत के साथ खेल अभ्यास करते हैं ...

संस्कारी, मृदुभाषी और जीवट के धनी हैं राजवीर पीलवान जी

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राजवीर पीलवान जी का जन्म 1 अप्रैल 1961 को दिल्ली के करावल नगर गाँव में एक संस्कारित किसान परिवार में हुआ। छह भाइयों और तीन बहनों में तीसरे स्थान पर जन्मे राजवीर जी ने उच्च शिक्षा प्राप्त की। 8 मई 1983 को उनका विवाह श्रीमती बालेश्वरी देवी (नागर) से हुआ। उनके दो पुत्र हैं — दोनों ने उच्च शिक्षा प्राप्त कर सरकारी अध्यापक की नौकरी प्राप्त की, जिनमें से बड़े पुत्र आज एक सफल यूट्यूबर Technical Dost के नाम से पहचाने जाते हैं। 11 मई 2022 को उनकी धर्मपत्नी के निधन के बावजूद, राजवीर जी ने सामाजिक कार्यों में अपनी निरंतर सक्रियता बनाए रखी। वे गुर्जर आर्ट एंड कल्चर ट्रस्ट और गुर्जर एजुकेशन वेलफेयर ट्रस्ट जैसे संगठनों से जुड़े हैं और समाजसेवा में समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। राजवीर जी अपनी विनम्रता, शिष्टाचार और सदैव मुस्कराते चेहरे के लिए जाने जाते हैं। वे प्रत्येक महिला को ‘बहन’ या ‘बेटी’ कहकर संबोधित करते हैं और सम्मानपूर्ण व्यवहार को प्राथमिकता देते हैं। वे तकनीकी रूप से दक्ष हैं और लेखन तथा संवाद में निपुण हैं। उन्होंने गुर्जर समाज, विशेषकर क्रांतिकारी पथिक जी पर आधारित शोधकार्यों में भी म...