कल्पनाओं को मूर्त रूप दे देने वाला शख्स

भूमिका

एक बच्चा था, जो बचपन से ही जिज्ञासु था और ज्ञान की ओर आकर्षित होता था। उसका मन हमेशा नई जानकारी हासिल करने और ज्ञान के सागर में गोता लगाने के लिए लालायित रहता था। सीमित साधनों से भी वह अच्छा प्रदर्शन कर पढ़ाई में अग्रणी रहने की कोशिश करता। किताबों से प्रेम और अध्ययन की ललक उसे कभी थमने नहीं देती थी। उसने खुद को न केवल शैक्षिक दृष्टि से मजबूत किया, बल्कि अपनी कमजोरियों पर भी काम किया। वह सोचता था कि ज्ञान केवल पुस्तकें पढ़ने से नहीं आता, बल्कि जीवन के अनुभवों और दूसरों से सीखने से भी मिलता है। धीरे-धीरे उसकी मेहनत रंग लाई, और उसने लाइब्रेरी विज्ञान में अपनी पढ़ाई पूरी की। अंततः, वह एक सफल लाइब्रेरियन बन गया। दिलचस्प यह कि उसने अपने ज्ञान को उच्चीकृत करना ना छोड़ा।

जानिए इस शख्स को

डॉ. विनय कुमार कैंथोला ने पीसी एप्लिकेशन में डिप्लोमा और पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने यूजीसी-नेट उत्तीर्ण किया है और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में पीएच.डी. की है। उनका शोध मुख्य रूप से एलआईआरसी में आईसीटी टूल्स के उपयोग, सूचना प्रबंधन और प्रसार में सोशल मीडिया टूल्स के उपयोग, और संस्थागत निर्माण गतिविधियों पर केंद्रित है। उलेक्ट्ज अकादमिक परिषद ने उन्हें वर्ष 2020 के लिए भारत के शीर्ष 50 प्रमुख पुस्तकालयाध्यक्षों में से एक के रूप में मान्यता दी (uLektz Wall of Fame)। उनके मार्गदर्शन में, एनआईआईटी विश्वविद्यालय के पुस्तकालय और सूचना केंद्र को DELNET द्वारा "सर्वोत्तम प्रथाएं: डेटा साझाकरण और पहुंच" प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। उनके पास पुस्तकालय और सूचना विज्ञान क्षेत्र में 26 वर्षों से अधिक का अनुभव है।  

डॉ. कैंथोला 14 अप्रैल 2014 से एनआईआईटी विश्वविद्यालय, नीमराना (अलवर) में पुस्तकालय और सूचना संसाधन केंद्र (LIRC) के प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कोहा (ओपन-सोर्स लाइब्रेरी प्रबंधन सॉफ़्टवेयर) को सफलतापूर्वक लागू किया है। उनके नेतृत्व में कई आईएनएफएलआईबीएनईटी (यूजीसी) पहलों को लागू किया गया है, जैसे कि ई-शोधसिंधु, शोधगंगा, शोध शुद्धि, आईआरआईएनएस, ई-पीजी पाठशाला, शिबोलेथ (रिमोट एक्सेस टूल) और ई-कंटेंट प्रबंधन प्लेटफ़ॉर्म।  

डॉ. कैंथोला ने उन लोगों के लिए एक मजबूत सहायता प्रणाली बनाने की दिशा में काम किया है जिनके पास पुस्तकालय सुविधाओं तक पहुंच नहीं है। उन्होंने दृष्टिहीन और प्रिंट विकलांग लोगों के लिए 'सुगम्य पुस्तकालय', बुकशेयर, एनवीडीए रीडर, और हाई-स्पीड स्कैनर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। इसके अलावा, उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक पुस्तकालयों को बढ़ावा देने के लिए 'ग्राम पाठशाला' नामक मिशन की शुरुआत की है।  

- एनयू एलआईआरसी पोर्टल का विकास, जो ज्ञान के विशाल भंडार का एकल प्रवेश बिंदु है।  

- एनआईआईटी विश्वविद्यालय प्रेस टास्क फोर्स के समन्वयक और ग्रेवांस रिड्रेसल कमेटी के सदस्य।  

- विश्वविद्यालय के वार्षिक व्याख्यान और दीक्षांत समारोह जैसे कार्यक्रमों के लिए आरएसवीपी की जिम्मेदारी।  

- पीएचडी शोध प्रबंध के लिए प्लेगरिज्म (साहित्यिक चोरी) संबंधी गतिविधियों के नोडल अधिकारी।  

- छात्रों के साथ मिलकर एलआईआरसी सेवाओं के उन्नयन के लिए परियोजनाओं का संचालन।  

डॉ. कैंथोला "एचएसएस-701 (रिसर्च एंड पब्लिकेशन एथिक्स)" पाठ्यक्रम के तहत साहित्यिक चोरी पहचान उपकरण (टर्निटिन, ओरिजिनल), शोध मीट्रिक्स, प्रकाशन नैतिकता, और यूजीसी-केयर जैसे विषय पढ़ाते हैं।  

- उन्होंने 'विद्या' लाइब्रेरी प्रबंधन सॉफ़्टवेयर के लिए वेब-आधारित उपयोगकर्ता मैनुअल और Y2K-फ्री लाइब्रेरी सॉफ़्टवेयर विकसित किया।  

- एनआईआईटी विश्वविद्यालय के लिए एक मोबाइल ऐप और महामारी के दौरान 16 से अधिक ई-कंटेंट पैकेज की उपलब्धता सुनिश्चित की।  

- दिल्ली जिमखाना क्लब, लॉरेंस स्कूल (सनावर), और अन्य प्रतिष्ठानों में स्वचालन परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू किया।  

उन्होंने पुस्तकालय उपयोगकर्ताओं के लिए कई कार्यशालाएं और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं और नि:शुल्क ऑनलाइन शिक्षण उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया है।  

डॉ. कैंथोला ने निजी संस्थानों में एक उत्कृष्ट पुस्तकालय प्रणाली विकसित की है और उनके मार्गदर्शन में कई प्रतिष्ठित परियोजनाएं पूरी हुई हैं। उनका मुख्य ध्यान उपयोगकर्ता संतुष्टि, आईसीटी का उपयोग, और पुस्तकालय सेवाओं के सतत विकास पर केंद्रित है।

सूचना स्रोत

डॉक्टर कैंथोला

प्रस्तुति



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