विजय सिंह 'पथिक'

किसी पद के लिए संघर्ष करना अलग बात है लेकिन अपने समाज को कुरीतियों के कुएं से बाहर यदि निकालना है तो ऐसे में संघर्ष करना ही पड़ेगा जहाँ निश्चित तौर पर तुम्हारी खाल और बाल भी खींचने वाले बहुत मिलेंगे फिर भी टिकना पड़ेगा। तब जाकर आप सामाजिक संघर्ष में सफलता अर्जित कर पाओगे जिसके लिए आपको स्वार्थ एवं अहंकाररहित व्यक्तियों के संगठन व समाज के प्रत्येक व्यक्ति के साथ जुड़ना होगा व समाज को कुरीतियों के कुएं से बाहर निकालने के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर देना होगा जैसे पथिक जी (भूप सिंह राठी) ने अपने देश में समाज के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। 

भारत देश को आजादी दिलाने के लिए वह स्वतंत्रता संग्राम में अपनी जान की परवाह किए बगैर कूद पड़े तथा देश के सबसे लंबे चलने वाले बिजोलिया के किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कुशलतापूर्वक किया व किसानों के अनेक लगान माफ भी कराए। स्वतंत्रता पश्चात भी उन्होंने एक विधवा स्त्री जानकी देवी से पुनर्विवाह कर समाज के लिए आदर्श प्रस्तुत किया और जब उनके बच्चे नहीं हुए तो उन्होंने एक पुत्र को गोद ना लेकर एक पुत्री को गोद लिया तथा समाज में एक नया उदाहरण पेश किया। वे सदैव स्त्रियों की दशा को समाज में सुधारने के लिए समर्पित रहते थे। 'पथिक' जी एक महान लेखक भी थे। वह हमारे गुर्जर समाज व देश का गर्व हैं। 27 फरवरी को प्रति वर्ष वर्ष उनकी जयंती पर गांव गुठवली अख्तियारपुर बुलंदशहर उत्तर प्रदेश में एक भव्य कार्यक्रम हवन व भोज का आयोजन वीर विजय पथिक फाउंडेशन के द्वारा किया जाता है जिसके मुख्य संरक्षक श्री एम. एस. राठी जी हैं जो 'पथिक' जी के ही परिवार से हैं जहां पथिक स्मारक है वहाँ हर वर्ष यह प्रोग्राम होता है।

रचनाकार

ज्योति भड़ाना (सम्पादिका)

उलझन सुलझन (लेडीज विंग)

फरीदाबाद (हरियाणा)

प्रस्तुति



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