एक पुस्तक की तरह है अम्बिका जी का व्यक्तित्व

भूमिका

कभी-कभी व्यक्तित्व किसी पुस्तक की तरह होता है—हर पन्ना एक नया अनुभव, हर अध्याय एक नयी दिशा। यह यात्रा केवल उपलब्धियों की नहीं होती, बल्कि उन मूल्यों और आदर्शों की होती है जो किसी साधारण व्यक्ति को असाधारण व्यक्तित्व में ढाल देते हैं। अम्बिका हेडा एक ऐसा ही नाम है—जहां व्यापार केवल लाभ नहीं, एक दृष्टिकोण है; जहां समाजसेवा एक दायित्व नहीं, आत्मसंतोष है; और लेखन केवल शब्द नहीं, हृदय की पुकार है।

यह परिचय उस स्त्री की कहानी है जिसने कठिनाइयों को सीढ़ी बनाया, अनुभवों को धरोहर, और सेवा को जीवन का मूल मंत्र।

अम्बिका हेडा

व्यवसायी/समाजसेविका/लेखिका

व्यवसाय: रिचलुक डिज़ाइनर ज्वेलरी की स्थापना

"हर अनुभव एक नई सीख लेकर आता है।"

इन्हीं शब्दों से शुरू हुई थी अम्बिका हेडा की व्यवसायिक यात्रा। सात वर्षों तक नृत्य प्रशिक्षण केंद्र 'झंकार' का सफल संचालन करते हुए, उन्होंने लगभग सौ छात्रों को कला का संस्कार दिया। लेकिन जब परिस्थितियाँ विपरीत हुईं और झंकार को विराम देना पड़ा, तो उन्होंने हार नहीं मानी—बल्कि एक नया सपना देखा।

अपने ही एक रिश्तेदार से थोड़े से स्टॉक के साथ 'रिचलुक डिज़ाइनर ज्वेलरी' की नींव रखी। बिना किसी आर्थिक सहायता के, केवल आत्मबल, ईमानदारी और सादगी के साथ अम्बिका ने व्यापार में अपनी अलग पहचान बनाई। वे मानती हैं कि आत्मनिर्भरता से उपजा आत्मविश्वास ही सबसे बड़ा निवेश होता है। आज 'रिचलुक' केवल एक ब्रांड नहीं, एक सोच है—कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो राहें स्वयं बनती जाती हैं।

संस्थापक: फ्लाइंग बर्ड्स सोसायटी

"इस दुनिया में आए हैं तो कुछ मुस्कानें बाँटकर ही मुस्कुराना है।"

इस भाव से जन्मी थी 'फ्लाइंग बर्ड्स सोसायटी', जिसकी नींव अम्बिका ने केवल अट्ठारह सखियों के साथ रखी, और पहला कार्यक्रम एक बधिर विद्यालय में हुआ। जब कार्यक्रम संपन्न हुआ, तब तक बत्तीस साथी जुड़ चुके थे।

आज, ग्यारह वर्षों से यह संस्था अजमेर के सभी 'विशेष बच्चों' के लिए कार्यरत है। हर माह का एक दिन पूरी तरह से बच्चों की पसंद को समर्पित होता है—चाहे वो पिकनिक हो, मेला, खेल या भोजन। संस्था न केवल कार्यक्रम आयोजित करती है, बल्कि जरूरतमंद संस्थाओं की आवश्यकताओं को भी यथासंभव पूरा करती है। सरकारी स्कूलों में समय-समय पर रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सशक्त किया जाता है। 'फ्लाइंग बर्ड्स' आज समाज हित की एक उड़ान है—जो निरंतर ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है।

लेखन: काव्य संग्रह 'मन के मोती' 

"भावनाओं को शब्द देना एक कला है!" 

अम्बिका ने इस कला को अपनाया है अपने सरल, संवेदनशील लेखन के माध्यम से। राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित काव्य संग्रह 'मन के मोती' रिश्तों की गहराइयों, सामाजिक चेतना और हृदय की भावनाओं को एक सजीव रूप देता है।

'अजमेर लेखिका मंच' से जुड़कर, मधु दीदी की प्रेरणा से प्रकाशित यह संग्रह, साहित्यिक दुनिया में अम्बिका की अभिव्यक्ति का एक सशक्त उदाहरण है।

सांगठनिक दायित्व: अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन


इस संगठन के लिए 2026-2028 तक निर्वाचित राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष के रूप में, अम्बिका अब एक ऐसे संगठन का नेतृत्व करेंगी जो न केवल राजस्थान की छत्तीस शाखाओं, बल्कि पूरे देश की चार सौ से अधिक इकाइयों और तीस हज़ार महिलाओं को एकजुट करता है।

यह संगठन सामाजिक चेतना, पर्यावरण सुरक्षा, रक्तदान, देहदान, गऊ सेवा, और राष्ट्र सेवा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निरंतर कार्य कर रहा है। अम्बिका का नेतृत्व इस संगठन को और अधिक प्रभावशाली बनाएगा—

"जहां सेवा केवल कर्म नहीं, एक जीवन शैली होगी।"

अम्बिका हेडा की कहानी केवल उनके कार्यों की नहीं, उनके जज़्बे की कहानी है। उन्होंने परिस्थितियों को साधन नहीं, साधना बनाया। उनके लिए हर भूमिका—व्यवसायी, समाजसेविका, लेखिका—एक माध्यम है उस उद्देश्य की पूर्ति का, जिसे वे जीवन का सत्य मानती हैं- "देते चलो, सहेजते चलो, बढ़ते चलो।"

सूचना स्रोत

डॉ छाया शर्मा जी

पाठ्य उन्नयन एवं विस्तार

चैट जीपीटी 

प्रस्तुति




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