कर्तव्यनिष्ठ प्रशासन का प्रेरक उदाहरण हैं श्री शिवजी लाल बम्बेरवाल
एक अनुशासित, संवेदनशील और पर्यावरणप्रेमी प्रधानाचार्य
शिक्षा केवल ज्ञान देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संस्कार, नेतृत्व और सेवा भावना से जोड़ने वाला सेतु है। इस सेतु को मजबूती से थामे हुए जिन व्यक्तित्वों ने अपनी कर्मठता और समर्पण से प्रेरणा का आधार बनाया, उनमें से एक नाम है — श्री शिवजी लाल बम्बेरवाल।
शैक्षिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि
श्री बम्बेरवाल ने अपने शैक्षिक जीवन की शुरुआत कार्यालय ब्लॉक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी - टोडारायसिंह में अतिरिक्त शिक्षा अधिकारी के रूप में की। उस भूमिका में उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों को सफलता से निभाया। वर्तमान में वे केन्द्रीय भेड़ ऊन संस्थान, अविकानगर, टोंक में स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, अविकानगर के प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत हैं।
आपकी सबसे प्रेरणादायक बात यह रही कि आप रोजाना 25 किलोमीटर की दूरी अपने गांव से मोटरसाइकिल द्वारा तय कर समय से पहले स्कूल पहुंचते थे। यह केवल समय की पाबंदी नहीं, बल्कि कर्तव्य के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण है।
प्रशासनिक कार्यशैली
संवाद और सहभागिता का मेल
श्री बम्बेरवाल का प्रशासनिक दृष्टिकोण एकल निर्णयों के बजाय सामूहिक भागीदारी पर आधारित रहा। विद्यालय में नियमित मासिक स्टाफ मीटिंग्स आयोजित कर शिक्षण व्यवस्था पर खुली चर्चा की जाती थी। शिक्षकों को निर्णय प्रक्रिया में सहभागी बनाना उनका मूल मंत्र था।
सिर्फ शिक्षक ही नहीं, अभिभावकों के साथ संवाद को भी उन्होंने गंभीरता से लिया। हर माह अभिभावक बैठकें होती थीं। उन्होंने अपने स्टाफ सदस्यों को बच्चों के घर भेजा, ताकि स्कूल और घर के बीच बेहतर तालमेल बने। कई बार वे स्वयं भी बच्चों के परिजनों से मिलने जाते थे।
शिक्षण में सक्रिय सहभागिता
विद्यालय में यदि शिक्षकों की कमी होती, तो प्रधानाचार्य होने के बावजूद बम्बेरवाल जी स्वयं कक्षाओं में जाकर अध्यापन कार्य करते थे। उनके लिए पद कभी बाधा नहीं बना, बल्कि शिक्षा का उद्देश्य सर्वोपरि रहा।
छात्रों के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की व्यवस्था की जाती थी ताकि कोई विद्यार्थी पिछड़ न जाए। परिणामस्वरूप विद्यालय का परीक्षा परिणाम लगातार सराहनीय रहा।
पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता
एक सफल प्रशासक वही होता है जो विद्यालय परिसर को केवल शैक्षणिक केंद्र नहीं, बल्कि जीवंत, सुंदर और सुरक्षित स्थान बनाए। श्री बम्बेरवाल ने इस सोच को वास्तविकता में बदला।
विद्यालय को हरा-भरा और स्वच्छ रखने के लिए वृक्षारोपण, सफाई अभियान जैसे प्रयास किए गए। भीषण गर्मी में बेज़ुबान पक्षियों के लिए परिण्डे बांधना उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।
विद्यालय परिवार की पहल पर विद्यार्थियों के लिए जल प्याऊ की व्यवस्था करवाई गई, जिससे समाज में सहभागिता की भावना भी विकसित हुई।
रचनात्मकता को बढ़ावा
शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसी सोच के तहत श्री बम्बेरवाल ने विद्यालय में साहित्यिक मंच-टोडारायसिंह के सहयोग से निबंध, पत्र लेखन, कहानी, चित्रकला आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया। विद्यार्थियों ने इसमें भाग लेकर न केवल पुरस्कार अर्जित किए, बल्कि अपनी अभिव्यक्ति क्षमता को भी विस्तार दिया।
नेतृत्व का संदेश
श्री बम्बेरवाल का जीवन हमें यह सिखाता है कि प्रशासन केवल बैठकर आदेश देने का नाम नहीं, बल्कि साथ खड़े होकर, मार्गदर्शन करते हुए आगे बढ़ने की प्रक्रिया है। उनका जीवन अनुशासन, संवाद, पर्यावरण प्रेम, और सेवा भावना का मेल है। वे आज भी समाज के लिए प्रेरणा हैं कि एक विद्यालय किस तरह सामाजिक परिवर्तन की प्रयोगशाला बन सकता है।
निष्कर्ष
आज जब विद्यालयों में प्रशासनिक चुनौतियों की चर्चा होती है, तब श्री शिवजी लाल बम्बेरवाल जैसे व्यक्तित्व यह सिद्ध करते हैं कि ईमानदारी, समय की पाबंदी, सहभागिता और संवेदनशील नेतृत्व से किसी भी संस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सकता है। उनका कार्य न केवल शिक्षा क्षेत्र में, बल्कि समाज की चेतना में भी एक आदर्श स्थान रखता है।
सूचना स्रोत
श्री शिवराज जी कुर्मी
पाठ्य उन्नयन एवं विस्तार व प्रकृति परिवर्तन
चैट जीपीटी
प्रस्तुति



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