साधारण किशोरी की असाधारण उड़ान
🌟 पूजा सिंह 🌟
हरियाणा के एक छोटे से गांव बोस्ती की रहने वाली पूजा सिंह आज लाखों किशोरियों के लिए उम्मीद की एक किरण बन चुकी हैं। एक ऐसा इलाका, जहाँ किशोरियों के सपने अक्सर घर की चारदीवारी में ही दम तोड़ देते हैं, वहीं से पूजा ने आसमान छूने की ठान ली।
उनके पिता हंसराज खुद एक खिलाड़ी बनना चाहते थे, लेकिन ज़िम्मेदारियों ने उन्हें राजमिस्त्री बना दिया। फिर भी उन्होंने अपनी बेटी के सपनों की नींव को कभी कमजोर नहीं होने दिया।
शुरुआत में पूजा योग और जिमनास्टिक में रुचि रखती थीं, लेकिन 2018 में कोच बलवान सिंह पात्रा से हुई मुलाक़ात ने उनकी दिशा ही बदल दी। कोच ने पूजा की काबिलियत को पहचाना और उन्हें ऊँची कूद (High Jump) के लिए तैयार किया।
🏋️♀️ सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन संकल्प और स्टैमिना ज़रूर था
पूजा के पास न जंपिंग मैट था, न हाइट मापने वाले उपकरण, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
उन्होंने पराली से भरे बोरे, बांस के खंभे और रबर टायर से ऐसा ट्रेंनिंग सेटअप बनाया, जिसे देखकर बड़े-बड़े स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट भी चकित हो जाएं।
💪 कड़ी मेहनत और स्टैमिना बिल्डिंग रूटीन
पूजा की सफलता सिर्फ तकनीक की नहीं, बल्कि फिजिकल और मेंटल स्टैमिना की भी कहानी है। उन्होंने अपनी ट्रेनिंग में शामिल किए:
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सुबह 5 बजे उठकर 10 किलोमीटर दौड़ना
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रेगुलर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: बर्फ से भरे बाल्टियों को उठाना, घर के छत पर खुद की बॉडीवेट से पुशअप्स
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ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ और मेडिटेशन: ताकि तनाव के समय फोकस बना रहे
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हाई इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) अपने कोर और लेग पावर को मजबूत करने के लिए
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डाइट और रिकवरी का भी पूरा ख्याल – देसी भोजन के साथ प्रोटीन युक्त आहार
यह सब उन्होंने बिना किसी प्रोफेशनल सुविधा के किया — और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई।
🏆 परिणाम? इतिहास रच दिया!
2025 में दक्षिण कोरिया में हुई एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पूजा ने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता।
यह पदक भारत को महिलाओं की ऊँची कूद में 25 साल बाद मिला। इससे पहले सिर्फ बॉबी एलॉयसियस ने यह करिश्मा किया था।
पूजा आज एशियाई ऊँची कूद में स्वर्ण पदक जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय हैं।
उनकी यह जीत सिर्फ एक खेल की जीत नहीं, हर उस किशोरी की जीत है जो सोचती है कि
"हम कुछ नहीं कर सकतीं।"
🏅 पूजा की प्रमुख उपलब्धियाँ
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🥇 एशियाई अंडर-18 चैंपियनशिप 2023, ताशकंद – स्वर्ण पदक (1.82 मीटर की छलांग)
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🥈 एशियाई अंडर-20 चैंपियनशिप 2023, येचेओन – रजत पदक
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🥉 राष्ट्रमंडल युवा खेल 2023, त्रिनिदाद और टोबैगो – कांस्य पदक
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🥇 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 – स्वर्ण पदक
💬 सन्देश प्रत्येक किशोरी के लिए
"अगर रास्ते मुश्किल हों तो रुकना नहीं चाहिए, क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है जो सपनों को सच करने का हौसला रखते हैं।"
पूजा की कहानी हमें सिखाती है कि जन्म कहाँ हुआ, इससे फर्क नहीं पड़ता – सपना कितना बड़ा है, ये मायने रखता है।
उनकी मेहनत यह दिखाती है कि फिजिकल ताकत और मानसिक धैर्य से हर बाधा को पार किया जा सकता है।
आइडिया
दैनिक अमर उजाला से साभार
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